दिल हमारा सुलगता जा रहा है,
पर बेचारा धड़कता जा रहा है।
क्या आज उसने सच बोला है,
क्यों ऐसे हदबदाता जा रहा है।
परछाई मेरी मुझ से भाग रही है,
एक तू है जो लिपटता जा रहा है।
वोह कहने लगे लड़के में कुछ तो है,
गिरते गिरते संभालता जा रहा है।
उम्र बढ़ी तो अकड़ कम हो गई,
अब जा के तू समजता जा रहा है.
Thursday, January 28, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment